Jaikal Mahakal Lyrics in Hindi & English – Goodbye Cinema

Jaikal Mahakal Lyrics penned by Swanand Kirkire, sung this song by Amit Trivedi & Suhas Sawant, and music composed by Amit Trivedi from Hindi film ‘GOODBYE‘.

Jaikal Mahakal Lyrics in Hindi & English – Goodbye Cinema Song Info

Detailed information regaring song Jaikal Mahakal Lyrics in Hindi & English – Goodbye Cinema.

Caption Detail
Lyrics Swanand Kirkire
Singers Amit Trivedi ,  Suhas Sawant
Music Amit Trivedi
Star Cast Amitabh Bachchan, Rashmika Mandanna, Neena Gupta
Song Label & Source Zee Music Company
Director Vikas Bahl
Producers Viraj Sawant, Vikas Bahl, Shobha Kapoor & Ektaa R Kapoor

Song Video

Song Lyrics

Jaikal Mahakal Lyrics in English

Mrityunjaya Rudraya
Neelakanthaya Shambhave
Amriteshaya Sarvaya
Mahadevayadhe Namaha

Om Mrityunjay Maharudra
Trahimam Sharnagatam
Janmamrityujara Vyadhi
Muthyathe Karmabandhanaih

Jai Kal Mahakal… Vikral Shambhu
Jeevan Ho Ya Mrityu… Dono Hi Tum Ho
Janmo Janmantar Ki… Ladiyan Yeh Kadiyan
Har Yoni Har Jeevan… Rakhwal Tum Ho

Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)
Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)

Jai Kal Mahakal Vikral Shambhu
Jeevan Ho Ya Mrityu Dono Hi Tum Ho
Janmo Janmantar Ki Ladiyan Yeh Kadiyan
Har Yoni Har Jeevan Rakhwal Tum Ho

Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)
Ho Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)

Srishti Ke Sanchalak Mahapraan Tum Ho
Tum Hi Sukh Tum Hi Duhkh Nirvaan Tum Ho
Sooraj Se Tejaswi Sagar Se Nirmal
Chanda Bhi Taare Bhi Brahmand Tum Ho

Jaikal Mahakal Jaikal Mahakal
Jaikal Mahakal Jaikal Mahakal

Jeevan Ki Naiya Tum Patvaar Tum Ho
Iss Paar Uss Paar… Majdhar Tum Ho
Kan Kan Yeh Har Kshan Yeh Tumse Bana Hai
Goonje Jo Ghat Bheetar Omkar Tum Ho

Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)
Ho Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)

Himalya Ke Sar Ka Sringaar Tum Ho
Ganga Ki Paavan Si Ek Dhaar Tum Ho
Dam Dam Dam Damru Ka… Ek Naad Tum Ho
Shankhon Ke Hridayon Ki… Hunkaar Tum Ho

Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)
Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)

Jai Kal Mahakal… Kirpal Shambhu
Trilok Vyape Hai… Tere Charan Ho
Teri Kripa Ho Toh Jeevan Prakat Ho
Tere Hi Kop Se… Srishti Bhasam Ho

Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)
Ho Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)

Jeevan Ka Mrityu Ka Khela Rachaya
Ek Laya Duniya Mein Ek Bhijwaya
Insan Bechare Ne Aansu Bahaya
Tera Yeh Khela… Samajh Hi Na Paya
(Tera Yeh Khela… Samajh Hi Na Paya)

Soche Ki Apna Koyi Khoya Gawaya
Jo Tera Tha Woh Ja Kar Tujhme Samaya
(Jo Tera Tha Woh Ja Kar Tujhme Samaya)
Tera Tha Woh Ja Kar Tujhme Samaya
Tera Tha Woh Ja Kar Tujhme Samaya

Jai Kal Mahakal Vikral Shambhu
Jeevan Ho Ya Mrityu Dono Hi Tum Ho
Janmo Janmantar Ki… Ladiyan Yeh Kadiyan
Har Yoni Har Jeevan… Rakhwal Tum Ho

Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)
Jaikal Mahakal (Jaikal Mahakal)

Jai Kal Mahakal… Vikral Shambhu
Jeevan Ho Ya Mrityu… Dono Hi Tum Ho
Janmo Janmantar Ki… Ladiyan Yeh Kadiyan
Har Yoni Har Jeevan… Rakhwal Tum Ho

Jaikal Mahakal… Jaikal Mahakal
Ho Jaikal Mahakal… Jaikal Mahakal
Jaikal Mahakal

Jaikal Mahakal Lyrics in Hindi

मृत्युंजयाय रुद्राय नीलकंठाय शंभवे
अमृतेशाय सर्वाय महादेवाय ते नमः
मृत्युंजय महारुद्रा त्राहिमाम शरणागतम्
जन्म मृत्युंजराव्यधिमुच्यते करमा बंधनायः

जय काल महाकाल विकराल शम्भो
जीवन हो या मृत्यु दोनों ही तुम हो
जन्मों जन्मान्तर की लड़ियाँ ये कड़ियाँ
हर योनि हर जीवन रखवाल तुम हो

जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)
जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)

सृष्टि के संचालक महाप्राण तुम हो
तुम ही सुख, तुम ही दुःख, निर्वाण तुम हो
सूरज से तेजस्वी सागर से निर्मल
चन्दा भी, तारे भी, ब्रम्हाण्ड तुम हो

जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)
जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)

जीवन की नैया तुम, पतवार तुम हो
इस पार, उस पार, मझधार तुम हो
कण-कण, ये हर क्षण, ये तुमसे बना है
गूँजे तो घट भीतर ओमकार तुम हो

जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)
जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)

हिमालय के सर का श्रृंगार तुम हो
गंगा की पावन सी एक धार तुम हो
डम डम डम डमरू का एक नाद तुम हो
शंखों के हृदयों की हुंकार (हुमकार) तुम हो

जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)
जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)

जय काल महाकाल किरपाल शम्भो
त्रिलोक व्यापे हैं तेरे चरण हो
तेरी कृपा हो तो जीवन प्रकट हो
तेरे ही कोप से सृष्टि भस्म (भसम) हो

जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)
जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)

जीवन का मृत्यु का खेला रचाया
एक लाया दुनिया में एक भिजवाया
इन्सान बेचारे ने आँसू बहाया
तेरा ये खेला समझ ही ना पाया
तेरा ये खेला समझ ही ना पाया

सोचे कि अपना कोई खोया गँवाया
जो तेरा था वो जाकर तुझमें समाया
जो तेरा था वो जाकर तुझमें समाया
जो तेरा था वो जाकर तुझमें समाया

जय काल महाकाल विकराल शम्भो
जीवन हो या मृत्यु दोनों ही तुम हो
जन्मों जन्मान्तर की लड़ियाँ ये कड़ियाँ
हर योनि हर जीवन रखवाल तुम हो

जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)
जय काल महाकाल (जय काल महाकाल)
जय काल महाकाल

Lyrics Meaning In Hindi

जय काल महाकाल Lyrics का विस्तृत अर्थ और भावार्थ

“जय काल महाकाल” भगवान शिव के विराट, रौद्र और करुणामय स्वरूप को समर्पित एक भक्तिमय रचना है। इस गीत में महाकाल को केवल मृत्यु के देवता के रूप में नहीं, बल्कि जीवन, मृत्यु, सृष्टि, संहार, समय, कर्म, मुक्ति और समस्त ब्रह्मांड के आधार के रूप में देखा गया है।

गीत का मूल भाव यह है कि संसार में जो कुछ दिखाई देता है—जीवन हो या मृत्यु, सुख हो या दुख, जन्म हो या अंत—सब उसी परम शक्ति की व्यवस्था का हिस्सा है। मनुष्य जिसे अपना नुकसान या बिछड़ना समझता है, वह भी परमात्मा की दृष्टि से एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन मात्र है।

मृत्युंजय और नीलकंठ शिव का अर्थ

गीत की शुरुआत भगवान शिव के कई पवित्र नामों और स्वरूपों के स्मरण से होती है। शिव को मृत्युंजय, अर्थात मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले, के रूप में संबोधित किया गया है।

यहाँ मृत्युंजय का अर्थ केवल शारीरिक मृत्यु को समाप्त कर देना नहीं है। आध्यात्मिक दृष्टि से इसका अर्थ है कि शिव उस भय से मुक्ति देने वाले हैं जो मनुष्य को मृत्यु और संसार के परिवर्तन से होता है।

शिव का नीलकंठ स्वरूप भी महत्वपूर्ण है। समुद्र मंथन से निकले विष को शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। इसलिए नीलकंठ त्याग, सहनशीलता और लोककल्याण का प्रतीक हैं।

गीत में भक्त शिव से शरण देने की प्रार्थना करता है। मनुष्य जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था, रोग और कर्मों के बंधन से परेशान होता है। वह महादेव से प्रार्थना करता है कि वे उसे इन सांसारिक बंधनों से मुक्त करें।

इसका गहरा संदेश है कि जब मनुष्य अपने अहंकार और भय को छोड़कर परमात्मा की शरण में जाता है, तब उसके भीतर आध्यात्मिक शांति का जन्म होता है।

महाकाल का अर्थ क्या है?

“महाकाल” शब्द दो भागों से मिलकर बना है—महान + काल।

यहाँ काल केवल घड़ी या समय नहीं है। काल वह शक्ति है जिसके कारण जन्म, परिवर्तन, वृद्धावस्था और मृत्यु होती है। समय किसी को नहीं छोड़ता। राजा और साधारण व्यक्ति, शक्तिशाली और कमजोर—सभी काल के नियम के अधीन हैं।

भगवान शिव का महाकाल स्वरूप इस सत्य की याद दिलाता है कि समय से ऊपर कोई सांसारिक शक्ति नहीं है।

जब भक्त “जय काल महाकाल” कहता है, तो वह उस परम सत्ता का स्मरण करता है जो समय को भी अपने भीतर समाए हुए है।

महाकाल का रौद्र रूप डराने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य मनुष्य को संसार की नश्वरता का बोध कराना है।

जो आज हमारे पास है, वह हमेशा हमारे पास नहीं रहेगा। शरीर बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं, संबंध बदलते हैं और अंततः जीवन भी एक दिन समाप्त होता है। इस सत्य को स्वीकार करने से मनुष्य मोह और अहंकार से धीरे-धीरे मुक्त हो सकता है।

जीवन और मृत्यु दोनों शिव के स्वरूप हैं

गीत का सबसे महत्वपूर्ण विचार यह है कि जीवन और मृत्यु दोनों को शिव से अलग नहीं देखा गया है।

आमतौर पर मनुष्य जीवन को स्वीकार करता है और मृत्यु से डरता है। लेकिन शिव के महाकाल स्वरूप में दोनों एक ही चक्र के हिस्से हैं।

जहाँ जन्म है, वहाँ मृत्यु भी है। जहाँ शुरुआत है, वहाँ अंत भी है। और जहाँ अंत होता है, वहीं किसी नए आरंभ की संभावना भी होती है।

इस दृष्टिकोण से मृत्यु केवल समाप्ति नहीं, बल्कि अस्तित्व के एक चरण का परिवर्तन है।

गीत मनुष्य को यह समझाने की कोशिश करता है कि जिस चीज को हम अंतिम विनाश मानते हैं, वह भी प्रकृति के विशाल चक्र का हिस्सा हो सकती है।

जन्म-जन्मांतर और कर्म का संबंध

गीत में जन्मों और विभिन्न जीवन अवस्थाओं का उल्लेख मिलता है। इसका संबंध भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में वर्णित कर्म और पुनर्जन्म की अवधारणा से है।

इस विचार के अनुसार मनुष्य के कर्म उसके जीवन को प्रभावित करते हैं। अच्छे और बुरे कर्मों के परिणाम व्यक्ति को किसी न किसी रूप में प्राप्त होते हैं।

महाकाल को हर जन्म और हर जीवन का रक्षक बताया गया है। इसका भाव यह है कि परमात्मा से कोई जीव अलग नहीं है।

मनुष्य किसी भी अवस्था में हो, उसके जीवन के पीछे वही परम सत्ता मौजूद है।

यह विचार भक्त को सुरक्षा और विश्वास की भावना देता है—कि जीवन की परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, ईश्वर की सत्ता उससे अलग नहीं है।

सृष्टि के संचालक महादेव

गीत में महादेव को पूरी सृष्टि के संचालन और जीवन की मूल ऊर्जा से जोड़ा गया है।

यहाँ शिव केवल किसी एक स्थान या मंदिर में विराजमान देवता नहीं हैं। उनका स्वरूप ब्रह्मांडीय है।

सूर्य की ऊर्जा, समुद्र की निर्मलता, चंद्रमा की शीतलता, तारों की चमक और पूरे ब्रह्मांड की विराटता—इन सबको शिव के व्यापक स्वरूप के प्रतीक के रूप में देखा गया है।

इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक प्राकृतिक वस्तु को केवल भौतिक रूप से शिव मान लेना चाहिए। बल्कि गीत प्रकृति के माध्यम से यह समझाता है कि ईश्वर की उपस्थिति पूरे अस्तित्व में अनुभव की जा सकती है।

प्रकृति जितनी विशाल है, शिव का स्वरूप उससे भी व्यापक माना गया है।

सुख, दुख और निर्वाण

गीत में शिव को सुख और दुख दोनों का आधार कहा गया है।

यह विचार बहुत गहरा है क्योंकि मनुष्य सामान्यतः सुख को स्वीकार करता है और दुख से भागना चाहता है। लेकिन भारतीय दर्शन में दोनों को जीवन के अनुभव का हिस्सा माना गया है।

सुख हमें आनंद देता है, जबकि दुख हमें जीवन की वास्तविकताओं से परिचित कराता है। दोनों अनुभव मनुष्य को बदलते हैं।

शिव का निर्वाण स्वरूप उस अवस्था का संकेत है जहाँ मनुष्य सांसारिक द्वंद्वों से ऊपर उठने का प्रयास करता है।

अर्थात केवल सुख प्राप्त करना ही जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं है। उससे आगे एक ऐसी चेतना की खोज है जहाँ मनुष्य मोह, भय और अहंकार से मुक्त होकर आत्मिक शांति अनुभव कर सके।

जीवन की नाव और महाकाल की पतवार

गीत में जीवन को एक नाव के समान समझाया गया है।

यह एक बहुत सुंदर आध्यात्मिक प्रतीक है।

संसार को नदी या समुद्र मानें तो मनुष्य उस पर चलने वाली नाव है। जीवन में कभी शांत पानी आता है और कभी तेज लहरें। कभी रास्ता स्पष्ट होता है और कभी मनुष्य भ्रमित हो जाता है।

ऐसे समय में शिव को नाव की पतवार के समान माना गया है।

इसका भाव है कि भक्त अपने जीवन की दिशा को ईश्वर के विश्वास से जोड़ता है। उसे विश्वास होता है कि चाहे वह जीवन के इस किनारे पर हो, उस किनारे पर हो या बीच की कठिन परिस्थितियों में हो, परम शक्ति उसके साथ है।

कण-कण में शिव की उपस्थिति

गीत का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश यह है कि संसार का प्रत्येक कण और प्रत्येक क्षण उसी परम सत्ता से जुड़ा हुआ है।

यह विचार अद्वैत और व्यापक ईश्वर-चेतना की भारतीय अवधारणाओं से जुड़ता है।

जब मनुष्य इस दृष्टि से संसार को देखता है, तो उसके लिए ईश्वर केवल पूजा के स्थान तक सीमित नहीं रहता।

प्रकृति, जीव-जंतु, मनुष्य, आकाश, जल, अग्नि और स्वयं जीवन—सबमें उसे परम सत्ता की झलक दिखाई देने लगती है।

इसी संदर्भ में भीतर गूंजने वाले ओंकार का उल्लेख आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।

हिमालय, गंगा और डमरू का प्रतीक

भगवान शिव का संबंध हिमालय से विशेष रूप से जोड़ा गया है। हिमालय स्थिरता, विशालता और तपस्या का प्रतीक है।

गंगा शिव की जटाओं से पृथ्वी पर उतरने वाली पवित्र धारा के रूप में भारतीय धार्मिक परंपरा में पूजनीय है। इसलिए गीत में गंगा को शिव के दिव्य स्वरूप से जोड़ा गया है।

इसी तरह डमरू शिव के नाद और सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक है।

डमरू की ध्वनि को ब्रह्मांडीय स्पंदन के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। शिव का तांडव जहाँ परिवर्तन और संहार का प्रतीक है, वहीं उसका नाद सृष्टि की गति और ऊर्जा की ओर संकेत करता है।

इस प्रकार हिमालय, गंगा और डमरू मिलकर शिव के स्थिर, पवित्र और गतिशील तीनों पक्षों को सामने रखते हैं।

शिव की कृपा और क्रोध

गीत में शिव की कृपा से जीवन के प्रकट होने और उनके क्रोध से सृष्टि के भस्म होने की बात आती है।

यहाँ “क्रोध” को केवल मनुष्य के सामान्य गुस्से की तरह समझना उचित नहीं होगा।

महाकाल का रौद्र रूप उस शक्ति का प्रतीक है जो अधर्म, अहंकार और विनाशकारी प्रवृत्तियों का अंत करती है।

शिव की कृपा सृजन, संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण से जुड़ी है, जबकि उनका रौद्र रूप परिवर्तन और संहार का प्रतीक है।

भारतीय दर्शन में संहार हमेशा नकारात्मक अर्थ नहीं रखता। पुरानी और अनुपयोगी अवस्था का अंत किसी नए रूप के जन्म का मार्ग भी बन सकता है।

जीवन और मृत्यु का रहस्य

गीत के अंतिम हिस्से में जीवन और मृत्यु के रहस्य को मनुष्य की दृष्टि से समझाने का प्रयास किया गया है।

मनुष्य जब किसी प्रिय व्यक्ति को खोता है, तो उसे लगता है कि उसका अपना कोई उससे दूर चला गया। उसके भीतर दुख, खालीपन और प्रश्न पैदा होते हैं।

लेकिन गीत एक अलग आध्यात्मिक दृष्टि प्रस्तुत करता है।

जिसे मनुष्य अपना समझ रहा था, वह वास्तव में परमात्मा की ही देन था। इसलिए मृत्यु के बाद वह अस्तित्व उसी परम सत्ता में विलीन हो जाता है, जिससे उसका संबंध पहले भी था।

यह विचार शोक को तुरंत समाप्त नहीं करता, लेकिन उसे एक अलग अर्थ देने की कोशिश करता है।

मनुष्य अपने प्रियजन की मृत्यु को केवल “खोना” न मानकर जीवन के व्यापक चक्र का हिस्सा समझ सकता है।

“तेरा था, तुझमें समाया” का आध्यात्मिक भाव

गीत के इस विचार में वैराग्य का गहरा संदेश है।

मनुष्य संसार में बहुत सी चीजों को अपना समझता है—शरीर, धन, संबंध, प्रतिष्ठा और उपलब्धियाँ। लेकिन समय के साथ इनमें से कुछ भी स्थायी नहीं रहता।

आध्यात्मिक दृष्टि से शरीर भी प्रकृति का हिस्सा है और अंततः प्रकृति में ही लौटता है।

इसी तरह जीवन में मिलने वाले लोग और संबंध भी एक निश्चित समय तक हमारे साथ रहते हैं।

इसलिए गीत मोह को समाप्त करने के बजाय मोह को समझने की दिशा देता है।

यह कहता है कि संसार से प्रेम करो, अपने संबंधों को सम्मान दो, लेकिन उन्हें शाश्वत और पूरी तरह अपना मानकर मत बैठो।

महाकाल का संदेश: भय से मुक्ति

पूरे गीत का सबसे बड़ा संदेश मृत्यु के भय से ऊपर उठना है।

महाकाल की भक्ति का अर्थ मृत्यु को नकारना नहीं है। बल्कि मृत्यु की वास्तविकता को स्वीकार करते हुए जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बनाना है।

जब मनुष्य समझता है कि समय सीमित है, तब वह अपने वर्तमान जीवन के प्रति अधिक सजग हो सकता है।

वह अपने अहंकार, क्रोध, लालच और अनावश्यक मोह को कम करने की कोशिश कर सकता है।

महाकाल हमें याद दिलाते हैं कि समय किसी के लिए नहीं रुकता। इसलिए जीवन में जो सही, meaningful और आध्यात्मिक है, उसे टालना नहीं चाहिए।

सरल शब्दों में पूरे गीत का सार

अगर “जय काल महाकाल” के पूरे भाव को बहुत सरल भाषा में समझें, तो इसका संदेश है:

भगवान शिव ही जीवन के आधार हैं और वही मृत्यु के अंतिम सत्य से भी जुड़े हैं। वे सृष्टि की शक्ति हैं, परिवर्तन की शक्ति हैं और संहार की शक्ति भी हैं। सूर्य, चंद्रमा, आकाश, गंगा, हिमालय और ब्रह्मांड की विशालता में उनके विराट स्वरूप की कल्पना की गई है।

मनुष्य जन्म और मृत्यु के बीच जीवन की यात्रा करता है। इस यात्रा में उसे सुख और दुख दोनों मिलते हैं। वह कई चीजों को अपना समझकर उनसे जुड़ता है और जब वे उससे दूर होती हैं तो दुखी होता है।

महाकाल की भक्ति उसे यह समझने में सहायता करती है कि संसार परिवर्तनशील है।

जो आया है, वह जाएगा। जो जन्मा है, वह बदलेगा। जो मिला है, उससे कभी न कभी अलग होना पड़ेगा।

लेकिन इस परिवर्तन के पीछे एक ऐसी परम सत्ता की कल्पना की गई है जो निरंतर बनी रहती है।

यही कारण है कि गीत में महाकाल को जीवन और मृत्यु दोनों के रूप में देखा गया है।

निष्कर्ष

“जय काल महाकाल” केवल भगवान शिव की स्तुति नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु को समझने वाली एक आध्यात्मिक दृष्टि भी प्रस्तुत करता है।

गीत का महाकाल मनुष्य को डराने वाला नहीं, बल्कि उसके भय को समझने और उससे ऊपर उठने की प्रेरणा देने वाला स्वरूप है।

इसमें शिव को सृष्टि के निर्माता, पालनकर्ता, संहारकर्ता, रक्षक और मुक्ति के मार्गदर्शक के रूप में देखा गया है।

गीत यह संदेश देता है कि जीवन की हर परिस्थिति स्थायी नहीं है। सुख भी बदलता है और दुख भी। जन्म के बाद मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के विचार के साथ भी जीवन का आध्यात्मिक अर्थ समाप्त नहीं होता।

इसलिए महाकाल की भक्ति का गहरा अर्थ है—समय की शक्ति को समझना, जीवन की नश्वरता को स्वीकार करना, अहंकार को कम करना, कर्म को महत्व देना और परमात्मा के प्रति विश्वास रखना।

“जय काल महाकाल” का मूल भाव इसी विश्वास में दिखाई देता है कि मनुष्य चाहे जीवन के किसी भी चरण में हो, वह उस विराट शक्ति से पूरी तरह अलग नहीं है जिसे भारतीय परंपरा में महादेव, शंभु और महाकाल कहा गया है।

इस दृष्टि से यह गीत केवल भक्ति का गीत नहीं रह जाता; यह मनुष्य को जीवन, मृत्यु, मोह, कर्म और आत्मिक शांति पर विचार करने का अवसर भी देता है।

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Lyrics : Swan ,  Kirkire Singers : Amit Trivedi ,  Suhas Sawant Music : Amit Trivedi Star Cast : Amitabh Bachchan, Rashmika Mandanna, Neena Gupta Song Label & Source : Zee Music Company Director : Vikas Bahl Producers : Viraj Sawant, Vikas Bahl, Shobha Kapoor & Ektaa R Kapoor

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